वात्सल्य धर्म से ग्रषित हर माँ
करती है पुष्ट शिशु की कामना
आकांक्षा कहे कर्त्तव्य कहे
दोनों में एक समानता
गूंजे घर में किलकारी
झूले आँगन में पालना
वात्सल्य धर्म से ग्रषित हर माँ
करती है पुष्ट शिशु की कामना
माँ का एक विचित्र रूप
मैंने देखा पहली बार
फूटपाथ पर अपंग शिशु सह
दाता का इंतजार
हाथ थे टेढ़े
पाँव अपूर्ण
प्रकृति का क्रूर प्रहार
ममता की देवी हाथ फैलाये
शिशु का निरंतर विलाप
फटे वस्त्र में लज्जा छुपाये
याचना बारम्बार
सभ्य समाज में क्षुदा तृप्ति
और जीवन का आधार
महल में शिशु का भूख में क्रंदन
करता वात्सल्य अस्तित्व में कम्पन
फुटपाथ पर
शिशु का पीड़ा रोदन
अद्भुत ! माँ का उत्साहवर्धन
कलियुग है ये कलियुग है
माता इसमें तेरा क्या दोष
पुत्र कर रहा अपने धर्मं का पालन
कर ले तू संतोष
- आदित्य कुमार श्रीवास्तव (22/1/13)
