तथाकथित विकास की सरपट भागती जिंदगी में हर क्षण कुछ न कुछ नया होता है परिभाषाएं बदलती है संस्कृति नविन चेहरा अख्तियार करती है समाज का ताना बाना रिश्तो की बदलती नियति से स्पंदित होता है ऐसे में कुछ नए विचार और अभिव्यक्तियाँ फूल की तरह खिलते है और मुरझा जाते है पर किसी को इसकी खबर तक नहीं होती...ये सार्थक उदगार है किसी के पसंद नापसंद की फिक्र किये बिना क्योंकि - असहमति का साहस और सहमति का विवेक ही मनुष्य को पशु की श्रेणी से अलग करता है- जय हिंद !
Sunday, January 21, 2018
परिवर्तन की बयार बह रही है. गणतंत्र दिवस आने को है. ऐसे में आइये एक ऐसे गाँव से परिचय करवाऊं जिसे इस मुल्क का सबसे देशभक्त गाँव कहा जाता है. विडिओ का लिंक निचे है. JAI HIND